परिचय: युद्ध की विभीषिका और कीव पर घातक प्रहार
यूक्रेन पर रूस द्वारा किया गया 4 जुलाई 2025 का ड्रोन और मिसाइल हमला अब तक के सबसे भीषण हमलों में से एक माना जा रहा है। इस हमले में रूस ने 550 से अधिक ड्रोन और 11 मिसाइलों का प्रयोग किया। हमले का मुख्य निशाना यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास के नागरिक व सामरिक ढांचे थे। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम की संभावनाओं को लेकर चर्चा चल रही थी।
इस हमले ने न केवल यूक्रेन के नागरिकों के जीवन को खतरे में डाला, बल्कि वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
हमले की विस्तृत जानकारी
4 जुलाई की सुबह, जब दुनिया अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर उत्सव में व्यस्त थी, रूस ने कीव और अन्य प्रमुख यूक्रेनी शहरों पर व्यापक हवाई हमला शुरू कर दिया। यूक्रेन की सेना ने बताया कि:
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रूस ने 550 से अधिक ड्रोन (Shahed-136/131) और 11 बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च कीं।
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हमले का मुख्य निशाना कीव, खारकीव, ड्निप्रो और ओडेसा क्षेत्र था।
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यूक्रेनी एयर डिफेंस ने लगभग 80% ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन कई नागरिक ठिकानों पर हमले सफल रहे।
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कम से कम 23 लोग घायल हुए, जबकि एक महिला की मृत्यु की पुष्टि हुई।
हमले में आवासीय इमारतें, बिजली संयंत्र, अस्पताल और रेलवे नेटवर्क प्रभावित हुए। कीव के कई हिस्सों में घंटों तक बिजली और पानी की आपूर्ति ठप रही।
हमले के पीछे रूस की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला रूस की ओर से एक "शक्ति प्रदर्शन" था, ताकि यूक्रेन और उसके सहयोगियों को यह संदेश दिया जा सके कि मास्को अब भी अपनी सैन्य क्षमताओं के चरम पर है। इस हमले के पीछे कुछ संभावित उद्देश्य माने जा रहे हैं:
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यूक्रेनी रक्षा प्रणाली की परीक्षा:
रूस ने इस हमले के ज़रिए यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली की क्षमताओं को परखने की कोशिश की है। इस बात का परीक्षण भी किया गया कि पश्चिमी देशों द्वारा भेजे गए एयर डिफेंस सिस्टम किस हद तक प्रभावी हैं। -
आर्थिक और मनोवैज्ञानिक दबाव:
नागरिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर रूस ने न केवल आर्थिक नुकसान पहुँचाया, बल्कि आम जनता में भय और असुरक्षा की भावना भी पैदा की। -
शांति वार्ता को विफल करना:
हाल ही में ट्रंप और पुतिन के बीच हुई बातचीत के बाद शांति की हल्की उम्मीद जगी थी। यह हमला उस बातचीत के तुरंत बाद हुआ, जिससे यह संकेत गया कि रूस फिलहाल किसी शांतिपूर्ण समझौते के मूड में नहीं है।
यूक्रेनी प्रतिक्रिया: डट कर मुकाबला
यूक्रेन ने इस हमले के तुरंत बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वह किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा। राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने एक आपात बैठक बुलाई और कहा:
"रूस की यह बर्बरता हमारे संकल्प को तोड़ नहीं सकती। हम अपने देश, अपनी जनता और अपनी स्वतंत्रता की रक्षा आखिरी साँस तक करेंगे।"
यूक्रेन ने मॉस्को और उसके पास स्थित सर्गिएव पोसाद क्षेत्र पर ड्रोन हमला किया, जिसमें एक पावर स्टेशन क्षतिग्रस्त हो गया और कई इलाकों में बिजली गुल हो गई।
वैश्विक प्रतिक्रिया और चिंता
इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा की गई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि:
"रूस का यह हमला मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन है। अमेरिका यूक्रेन के साथ खड़ा है।"
यूरोपीय संघ और नाटो देशों ने भी रूस की निंदा की और यूक्रेन को अतिरिक्त रक्षा सहायता देने का वादा किया। जर्मनी और फ्रांस ने एयर डिफेंस सिस्टम और मानवता सहायता भेजने की तत्काल घोषणा की है।
भारत और चीन ने अभी तक कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र में शांति बहाली को लेकर नई चर्चा शुरू हो चुकी है।
जनता की स्थिति: खौफ और हिम्मत दोनों
हमले के बाद कीव की सड़कों पर सन्नाटा छा गया। स्कूल, अस्पताल और बाजार बंद कर दिए गए। लेकिन इस भयावह माहौल के बीच यूक्रेनी नागरिकों ने अपनी जिजीविषा को बरकरार रखा।
एक स्थानीय नागरिक ने कहा:
"हम डरते हैं, लेकिन झुकेंगे नहीं। यह हमारी जमीन है और हम इसके लिए लड़ेंगे।"
निष्कर्ष: युद्ध का नया अध्याय
रूस द्वारा किया गया यह हमला युद्ध की दिशा को एक नया मोड़ दे सकता है। जहां एक ओर यह दिखाता है कि रूस अभी भी पूरी ताकत से मैदान में है, वहीं यूक्रेन की साहसी प्रतिक्रिया यह साबित करती है कि वह झुकने को तैयार नहीं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह समय निर्णायक है। अगर अब भी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह युद्ध और भी भयानक रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
आगे क्या?
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क्या रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम की कोई गुंजाइश बाकी है?
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पश्चिमी देशों की मदद क्या इस हमले के बाद और बढ़ेगी?
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आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तय करेंगे कि यूक्रेन युद्ध किस दिशा में बढ़ेगा।

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