🔷 परिचय
21वीं सदी के तीसरे दशक में वैश्विक शक्ति संतुलन केवल सैन्य ताकत या आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि रणनीतिक संसाधनों की आपूर्ति पर भी निर्भर होने लगा है। इनमें प्रमुख भूमिका निभाते हैं – क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिज)।
2025 में क्वॉड (QUAD) देशों — भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया — ने इस आवश्यकता को पहचानते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया: “Quad Critical Minerals Initiative” की शुरुआत। यह पहल न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने की दिशा में प्रयास है, बल्कि चीन की बाजार पर निर्भरता को भी चुनौती देने की रणनीति मानी जा रही है।
🔶 क्रिटिकल मिनरल्स क्या हैं और क्यों ज़रूरी हैं?
क्रिटिकल मिनरल्स वे दुर्लभ खनिज होते हैं जो उच्च तकनीकी उत्पादों, जैसे – बैटरियां, मोबाइल, सेमीकंडक्टर्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), मिसाइल सिस्टम, और ड्रोन आदि – में अनिवार्य होते हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
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लिथियम (Li)
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कोबाल्ट (Co)
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ग्रेफाइट (C)
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नियोडिमियम, प्रसेओडिमियम (REEs)
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निकल, मैंगनीज, टंगस्टन आदि
आज की दुनिया में जो भी देश इन खनिजों की आपूर्ति पर नियंत्रण रखता है, वह तकनीकी और सामरिक क्षेत्र में बढ़त हासिल करता है।
🔷 क्वॉड “क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव” की पृष्ठभूमि
📍 क्यों ज़रूरत पड़ी?
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चीन की निर्भरता:
चीन आज 60–70% वैश्विक रेयर अर्थ मिनरल्स की रिफाइनिंग और आपूर्ति करता है। इससे अमेरिका, भारत और जापान की आपूर्ति श्रृंखलाएं असुरक्षित हो जाती हैं। -
रूस-यूक्रेन युद्ध और आपूर्ति संकट:
इस संघर्ष के चलते खनिजों की आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक कीमतें बढ़ गईं। -
ऊर्जा संक्रमण की चुनौती:
EV, बैटरी और हरित ऊर्जा पर बढ़ते फोकस ने इन खनिजों की मांग को कई गुना बढ़ा दिया।
📍 कब और कहाँ हुआ ऐलान?
1 जुलाई 2025 को वाशिंगटन में क्वॉड विदेश मंत्रियों की 10वीं बैठक के दौरान इसका औपचारिक ऐलान किया गया।
🔶 प्रमुख उद्देश्य और लक्ष्य
| उद्देश्य | विवरण |
|---|---|
| आपूर्ति विविधीकरण | चीन की बजाय ऑस्ट्रेलिया, भारत, अफ्रीका जैसे देशों से स्रोत ढूंढना |
| साझा निवेश फंड | खनिजों की खोज, उत्पादन और रिफाइनिंग के लिए सामूहिक फंडिंग |
| प्रौद्योगिकी साझेदारी | रिफाइनिंग, प्रोसेसिंग और भंडारण तकनीकों में साझेदारी |
| इको-फ्रेंडली माइनिंग | पर्यावरणीय मानकों के अनुसार खनन नीति |
| सुरक्षित भंडारण और ट्रैकिंग | खनिजों की सप्लाई चेन का रीयल-टाइम डेटा साझा करना |
🔷 भारत की भूमिका
भारत के पास क्रिटिकल मिनरल्स के सीमित स्रोत हैं लेकिन संभावनाएं बहुत हैं — जैसे:
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झारखंड, ओडिशा, राजस्थान और कर्नाटक में लिथियम, निकल, कोबाल्ट की खोज चल रही है।
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भारत ने 2023 में “Critical Minerals Strategy” जारी की थी।
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खनिज मंत्रालय ने भारत में 26 दुर्लभ खनिजों को ‘रणनीतिक’ घोषित किया है।
क्वॉड पहल के ज़रिए भारत:
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जापान और अमेरिका से तकनीकी सहयोग पाएगा
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ऑस्ट्रेलिया से खनिज आयात और संयुक्त खनन परियोजनाएं चलाएगा
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वैश्विक EV बैटरी बाजार में खुद को मजबूत करेगा
🔷 ऑस्ट्रेलिया का योगदान
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का अग्रणी लिथियम उत्पादक है, और ग्रेफाइट व रेयर अर्थ मिनरल्स में भी उसकी पकड़ मजबूत है।
क्वॉड इनिशिएटिव में:
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ऑस्ट्रेलिया प्रमुख निर्यातक बनेगा
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नई रिफाइनरीज़ और खनिज प्रोसेसिंग इकाइयाँ विकसित होंगी
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क्वींसलैंड और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया में नए निवेश शुरू होंगे
🔷 जापान और अमेरिका की तकनीकी भूमिका
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जापान: खनिजों की रीसाइक्लिंग तकनीक में विशेषज्ञता, बैटरी निर्माण और EV में अग्रणी भूमिका
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अमेरिका: रिफाइनिंग टेक्नोलॉजी, स्टोरेज, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी में लीडर
क्वॉड देशों की यह सहभागिता आपसी तकनीकी और आर्थिक निर्भरता को कम करते हुए एक स्थायी समाधान की दिशा में अग्रसर है।
🔷 भविष्य की रणनीति
🛠️ संयुक्त क्रियान्वयन एजेंसियाँ
क्वॉड देशों द्वारा एक Critical Minerals Security Group बनाई जाएगी जो:
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परियोजनाओं की निगरानी करेगी
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आपूर्ति बाधाओं की पहचान करेगी
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भौगोलिक जोखिमों की समीक्षा करेगी
🧪 शोध एवं विकास (R&D)
बैटरी पुनर्चक्रण, वैकल्पिक खनिज उपयोग, और पर्यावरण-संवेदनशील तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा।
🔶 वैश्विक राजनीतिक प्रभाव
🇨🇳 चीन पर रणनीतिक दबाव
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चीन को वैश्विक वर्चस्व बनाए रखने के लिए अब प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
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क्वॉड का यह कदम 'वन कंट्री डॉमिनेंस' की धारणा को चुनौती देता है।
🌍 अन्य देशों को विकल्प
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अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों को चीन के अलावा नए रणनीतिक साझेदार मिल सकते हैं।
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विश्व बैंक, IMF जैसे संस्थान इन साझेदारियों को सहयोग कर सकते हैं।
🔷 चुनौतियाँ और संभावनाएँ
| चुनौती | समाधान |
|---|---|
| पर्यावरणीय जोखिम | ईको-फ्रेंडली माइनिंग नीतियाँ और CSR |
| तकनीकी संसाधनों की कमी | जापान-अमेरिका से तकनीकी साझेदारी |
| राजनीतिक बाधाएँ | लोकतांत्रिक देशों की पारदर्शिता नीति |
| निवेश और पूंजी की आवश्यकता | क्वॉड निवेश फंड और निजी क्षेत्र की भागीदारी |
🔷 निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा
“Quad Critical Minerals Initiative” केवल खनिजों की आपूर्ति का मामला नहीं, बल्कि एक भविष्य की भू-रणनीतिक योजना है।
यह पहल भारत जैसे विकासशील देशों को तकनीकी स्वतंत्रता, ऊर्जा सुरक्षा, और वैश्विक नेतृत्व की ओर एक कदम बढ़ाने में मदद करेगी।
इस साझेदारी से क्वॉड देश एक सुरक्षित, पारदर्शी, और न्यायसंगत वैश्विक आपूर्ति तंत्र का निर्माण करेंगे — जो कि न सिर्फ वर्तमान तकनीकी प्रतिस्पर्धा में, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में भी निर्णायक सिद्ध होगी

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