यूरोप में भीषण हीटवेव का प्रकोप: जलवायु परिवर्तन की चेतावनी
भूमिका:
जून 2025 के अंतिम सप्ताह में यूरोप के कई देश – स्पेन, फ्रांस, ग्रीस और इटली – भीषण हीटवेव की चपेट में आ गए हैं। तापमान 42°C से ऊपर पहुँच चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए। यह संकट न केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल रहा है।
गर्मी का रिकॉर्ड टूटता हुआ
-
स्पेन: मैड्रिड, सेविला और बार्सिलोना में तापमान 44°C को पार कर गया है। खेतों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है और जलस्रोत सूख रहे हैं।
-
फ्रांस: पेरिस और दक्षिणी फ्रांस में 43°C तक तापमान पहुँच चुका है। बिजली की भारी खपत के कारण कई इलाकों में बिजली कटौती हुई है।
-
ग्रीस: 42°C की भीषण गर्मी के चलते एथेंस और आसपास के जंगलों में आग लगने की चेतावनी दी गई है।
-
इटली: रोम, सिसली और ट्यूरिन जैसे शहरों में लोग गर्मी से बेहाल हैं और अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
WHO का अलर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यह हीटवेव बेहद खतरनाक है:
-
बुजुर्ग और बच्चे गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
-
निर्जलीकरण, लू और हीट स्ट्रोक जैसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
-
WHO ने हर नागरिक को दिन में 2-3 लीटर पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और घर के अंदर रहने की सलाह दी है।
जंगलों में आग और पर्यावरणीय संकट
-
ग्रीस: एथेंस के बाहर पेंटेली और इविया द्वीप पर जंगल की आग फैल चुकी है।
-
फ्रांस और इटली में भी तापमान और सूखे की स्थिति के चलते जंगलों में आग का खतरा मंडरा रहा है।
-
वायु प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है जिससे अस्थमा और सांस की बीमारियों में इज़ाफा हो रहा है।
जलवायु परिवर्तन की पृष्ठभूमि
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह हीटवेव जलवायु परिवर्तन का सीधा परिणाम है:
-
वैश्विक तापमान में पिछले 100 वर्षों में 1.2°C की वृद्धि हुई है।
-
आर्कटिक में बर्फ पिघलने, समुद्री स्तर के बढ़ने और वर्षा के पैटर्न बदलने से यह असंतुलन पैदा हो रहा है।
-
यूरोप में हीटवेव अब सामान्य बनती जा रही हैं – 2019, 2022 और अब 2025 में भारी गर्मी के रिकॉर्ड टूटे हैं।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
-
कृषि पर प्रभाव: सूखे के कारण फसलें खराब हो रही हैं, खासकर गेहूं, जैतून और अंगूर की खेती प्रभावित हो रही है।
-
पर्यटन में गिरावट: गर्मी के कारण पर्यटक प्रमुख शहरों से दूर हो रहे हैं। कई टूरिस्ट साइट्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
-
बिजली और पानी की मांग: एयर कंडीशनिंग की मांग बढ़ने से बिजली संकट गहरा गया है और पानी की सप्लाई में रुकावट आ रही है।
सरकारों की प्रतिक्रिया
-
ग्रीस सरकार ने आग प्रभावित क्षेत्रों में आपातकाल घोषित कर दिया है और सेना को मदद के लिए बुलाया गया है।
-
फ्रांस और स्पेन में गर्मी से राहत के लिए सार्वजनिक कूलिंग सेंटर्स खोले गए हैं।
-
EU स्तर पर पर्यावरणीय आपातकालीन योजना लागू की गई है जिसमें हीटवेव से प्रभावित लोगों को सहायता, चिकित्सा सुविधा और जल संरक्षण उपाय दिए जा रहे हैं।
नागरिकों के लिए सुझाव
-
दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर न निकलें।
-
पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और ओआरएस का सेवन करें।
-
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
-
पेट्स और जानवरों के लिए भी पानी की व्यवस्था करें।
निष्कर्ष
यह भीषण हीटवेव एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जलवायु परिवर्तन अब कोई भविष्य की समस्या नहीं, बल्कि वर्तमान की आपात स्थिति है। सरकारों, संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर टिकाऊ जीवनशैली अपनानी होगी और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
अन्यथा, आने वाले वर्षों में यह गर्मी जानलेवा और स्थायी संकट बन सकती है।
Comments
Post a Comment