ईरान–इज़राइल संघर्षविराम: एक अस्थायी शांति या अगला युद्ध विराम

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**भूमिका:**

28 जून 2025 की सुबह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ लेकर आई जब अमेरिका की मध्यस्थता में ईरान और इज़राइल के बीच संघर्षविराम लागू किया गया। पिछले दो सप्ताहों से चल रहे तीव्र सैन्य संघर्ष के बीच यह सीज़फायर एक आशा की किरण के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके स्थायित्व को लेकर संदेह बना हुआ है।


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### संघर्ष की पृष्ठभूमि:


मध्य-पूर्व लंबे समय से वैश्विक संघर्षों का केंद्र रहा है और ईरान–इज़राइल तनाव कोई नया अध्याय नहीं है। हालिया टकराव की शुरुआत तब हुई जब इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों — फ़ोर्डो, नतांज़ और इस्फहान — पर हवाई हमले किए। इन हमलों के जवाब में ईरान ने इज़राइल के तेल अवीव, हाइफ़ा और यरुशलम पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस युद्ध ने न केवल दोनों देशों को, बल्कि समूचे मध्य-पूर्व और वैश्विक समुदाय को अस्थिर कर दिया।


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### परमाणु ठिकानों पर हमलों का प्रभाव:


1. **सीमित क्षति:**

   इज़राइल के हमलों ने ईरान के परमाणु ढांचे को थोड़ी बहुत क्षति पहुंचाई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, परमाणु सामग्री और संवर्धन क्षमता को गंभीर क्षति नहीं पहुँची है।


2. **दुनिया भर में चिंता:**

   इन हमलों ने वैश्विक स्तर पर यह चिंता पैदा की कि परमाणु ठिकानों पर हमले से रेडियोधर्मी रिसाव हो सकता था, जिससे पर्यावरणीय आपदा उत्पन्न हो सकती थी। हालांकि अब तक ऐसा कोई बड़ा रिसाव सामने नहीं आया।


3. **ईरान की प्रतिक्रिया:**

   ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला करार दिया और चेतावनी दी कि भविष्य में इससे भी कठोर जवाब दिया जाएगा।


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### गाज़ा: संघर्ष का नया केंद्र


सीज़फायर के बावजूद, गाज़ा में स्थिति गंभीर बनी हुई है। गाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इज़राइल की कार्रवाई में अब तक 23 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। यह मानवाधिकार संगठनों के बीच गहरी नाराज़गी का कारण बना है।


* **मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रियाएं:**


  * ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इज़राइल की कार्रवाई को अनुचित और असंतुलित बताया।

  * संयुक्त राष्ट्र ने गाज़ा में स्वतंत्र जांच की मांग की है।


* **इज़राइल का पक्ष:**


  * इज़राइली सरकार ने दावा किया कि यह हमले आतंकवादियों के ठिकानों पर केंद्रित थे और नागरिकों को हताहत होने से बचाने के लिए चेतावनियाँ दी गई थीं।


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### अमेरिकी भूमिका: एक नया संतुलन


अमेरिका ने दोनों पक्षों पर दबाव बनाकर संघर्षविराम लागू करवाया। अमेरिकी विदेश मंत्री ने इसे बाइडेन प्रशासन की कूटनीतिक जीत बताया। अमेरिका का उद्देश्य स्पष्ट है — मध्य-पूर्व में स्थायित्व, तेल आपूर्ति की सुरक्षा और चीन-रूस के बढ़ते प्रभाव को सीमित करना।


* **संयुक्त बयान:** अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने संयुक्त रूप से संघर्षविराम का स्वागत किया और दोनों पक्षों से रचनात्मक संवाद की अपील की।


* **नवीन वार्ता प्रस्ताव:** अमेरिका ने अगले सप्ताह दोहा या इस्तांबुल में एक उच्चस्तरीय वार्ता का प्रस्ताव रखा है।


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### भविष्य की चुनौतियाँ:


1. **स्थायी शांति की संभावना:**

   जब तक ईरान और इज़राइल के बीच गहरे वैचारिक, धार्मिक और भू-राजनीतिक मतभेद बने रहेंगे, तब तक शांति केवल कागज़ी हो सकती है।


2. **परमाणु नियंत्रण की निगरानी:**

   IAEA और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाए बिना परमाणु जोखिम को कम करना संभव नहीं होगा।


3. **गाज़ा और मानवाधिकार:**

   जब तक गाज़ा जैसे क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, संघर्षविराम को वास्तविक मानवीय शांति नहीं माना जा सकता।


4. **साइबर और अप्रत्यक्ष युद्ध:**

   दोनों देश अब पारंपरिक युद्ध से इतर साइबर और सूचना युद्ध की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं, जिससे संकट की एक नई परत उत्पन्न होती है।


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### भारत का दृष्टिकोण:


भारत ने इस संघर्षविराम का स्वागत किया है और क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थन किया है। साथ ही, भारत ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया तेज़ की और ऊर्जा आयात के विकल्पों की समीक्षा शुरू कर दी है।


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### निष्कर्ष:


ईरान–इज़राइल संघर्षविराम भले ही एक सकारात्मक शुरुआत हो, परंतु यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। जब तक दोनों देश आपसी सम्मान और संवाद के मार्ग पर नहीं चलते, तब तक यह संघर्षविराम केवल एक अस्थायी विराम ही रहेगा।


मानवता, पर्यावरण और वैश्विक शांति के लिए यह आवश्यक है कि कूटनीति को हथियारों से पहले प्राथमिकता दी जाए। आने वाले सप्ताह

 यह तय करेंगे कि यह विराम शांति का प्रवेशद्वार बनेगा या अगले युद्ध की भूमिका।

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