**ईरान-इज़राइल संघर्ष में अमेरिका की एंट्री और ‘ऑपरेशन सिंधु’ के अंतर्गत 827 भारतीयों की सुरक्षित वापसी
‘ऑपरेशन सिंधु’: संकट में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी की अद्भुत कहानी
बीते कुछ दिनों से मध्य-पूर्व एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। ईरान और इज़राइल के बीच छिड़े संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया जंग की आग में झुलस रहा है, भारत ने एक बार फिर अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी कड़ी में भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंधु’ नामक एक साहसिक और मानवीय मिशन को अंजाम दिया, जिसके अंतर्गत अब तक 827 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया गया है।
इस पूरे अभियान की पृष्ठभूमि उस समय शुरू हुई जब ईरान के तीन महत्वपूर्ण परमाणु ठिकानों – Fordow, Natanz और Esfahan – पर अमेरिका द्वारा बी‑2 बमवर्षकों से हमला किया गया। इन हमलों की पुष्टि खुद अमेरिका ने की है और इसे “बहुत सफल” सैन्य कार्रवाई बताया है। इस अप्रत्याशित हमले के बाद ईरान में रह रहे विदेशी नागरिकों, खासतौर पर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता पैदा हो गई थी।
जैसे ही हमले की खबर फैली, भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय, एयर फोर्स और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर तत्काल एक उच्चस्तरीय निकासी योजना पर कार्य शुरू किया। इस योजना को नाम दिया गया – ‘ऑपरेशन सिंधु’, जो भारतीय सभ्यता की शांतिप्रिय और जीवनरक्षक नीतियों का प्रतीक भी है।
ऑपरेशन सिंधु का संचालन कई स्तरों पर हुआ –
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सबसे पहले ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास और कांसुलेट्स ने फंसे हुए नागरिकों की सूची तैयार की।
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फिर विशेष विमानों और सैन्य उड़ानों की मदद से नागरिकों को तेहरान, इस्फ़हान और अन्य खतरनाक क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया गया।
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ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर जैसे भारी परिवहन विमानों का भी प्रयोग किया गया।
निकासी की प्रक्रिया केवल सैन्य ताकत का ही नहीं, बल्कि भारत के मानवीय दृष्टिकोण और वैश्विक जिम्मेदारी के भाव का भी परिचायक थी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्वयं इस अभियान की निगरानी की और लगातार अपडेट्स साझा किए। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “भारत अपने नागरिकों को कभी नहीं भूलता, संकट कोई भी हो – हम साथ खड़े रहते हैं। ऑपरेशन सिंधु इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।”
इस मिशन के सफल संचालन से यह स्पष्ट हो गया कि भारत अब न केवल एक मजबूत सैन्य और आर्थिक शक्ति है, बल्कि मानवीय मूल्यों की रक्षा करने वाला वैश्विक नेतृत्वकर्ता भी बन चुका है। इस ऑपरेशन ने भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को और भी सशक्त किया है।
जो भारतीय नागरिक इस ऑपरेशन के तहत स्वदेश लौटे हैं, उनके चेहरों पर राहत और आंखों में आभार साफ झलकता है। बहुत से लोगों ने बताया कि यदि भारत ने समय रहते यह कदम न उठाया होता, तो उनका जीवन संकट में पड़ सकता था।
निष्कर्षतः, ‘ऑपरेशन सिंधु’ सिर्फ एक निकासी मिशन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक व मानवीय अभियान था, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर मोर्चे पर डटकर खड़ा रहता है — चाहे वह जंग का मैदान हो या कूटनीति का क्षेत्र।


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