मध्य-पूर्व संघर्ष 2025: इज़राइल–ईरान टकराव और वैश्विक परिणाम


🔥 मध्य-पूर्व संघर्ष 2025: इज़राइल–ईरान टकराव और वैश्विक परिणाम

प्रस्तावना:

जून 2025 की अंतिम तिथि पर विश्व एक बार फिर ऐसे संकट की ओर बढ़ता दिखा जिसमें केवल दो देशों का नहीं, बल्कि पूरे विश्व-व्यवस्था का संतुलन दांव पर लग सकता है। इज़राइल द्वारा ईरान के नाभिकीय ठिकानों पर किया गया ताज़ा हवाई हमला और उसके प्रतिउत्तर में ईरान द्वारा क़तर और इराक में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बैलिस्टिक मिसाइल दागना — यह सब एक नए क्षेत्रीय युद्ध की आहट देता प्रतीत होता है।


इज़राइल का हमला: उद्देश्य और क्रियान्वयन

29 जून 2025 को स्थानीय समयानुसार सुबह 4:00 बजे इज़राइली वायुसेना ने ईरान के दक्षिण इस्फहान और नटांज क्षेत्र में स्थित नाभिकीय विकास केंद्रों पर हवाई हमले किए। यह हमले तथाकथित "ऑपरेशन रेड सेंड" के तहत किए गए।

मुख्य निशाने थे:

  • नटांज यूरेनियम संवर्धन केंद्र

  • इस्फहान मिलिट्री बंकर जिसमें ईरान के IRGC (Revolutionary Guard) की बॉलिस्टिक यूनिट थी

  • एक सीक्रेट बेस, जहाँ ईरानी कमांडर जनरल रज़ा हाशमी की बैठक चल रही थी

प्रभाव:

  • 3 प्रमुख ईरानी वैज्ञानिकों और 2 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मृत्यु हुई

  • यूरेनियम स्टॉक का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ

  • ईरानी सरकार ने “युद्ध की घोषणा” की संज्ञा दी

इज़राइल का तर्क:
इज़राइली प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने प्रेस को बताया कि यह हमला "पूर्व-सक्रिय आत्मरक्षा" के सिद्धांत के तहत किया गया। उन्होंने कहा कि खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान 3 महीनों के भीतर हथियार-योग्य यूरेनियम की तैयारी कर रहा था।


ईरानी प्रतिक्रिया: तेज़ और शक्तिशाली

ईरान ने इज़राइल के हमले का जवाब देने में देर नहीं की। उसी दिन शाम को ईरानी Al-Quds Force और IRGC Aerospace Unit ने लगभग 17 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से:

  • 6 मिसाइलें क़तर के अल-उदयद अमेरिकी वायु अड्डे पर गिरीं

  • 5 मिसाइलें इराक के अल-असद और इरबिल स्थित अमेरिकी बेस पर

परिणाम:

  • क़तर में 9 अमेरिकी सैनिक घायल, 2 की हालत गंभीर

  • इराक में तेल रिफाइनरी को आंशिक क्षति

  • अमेरिकी सुरक्षा बलों ने 4 मिसाइलों को THAAD और Patriot सिस्टम के जरिए नष्ट किया

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने टेलीविज़न पर कहा:

“हम शांति के पक्षधर हैं, पर यदि कोई हमें घायल करता है, तो हम उसका हाथ काट देंगे।”


वैश्विक प्रतिक्रिया: तनाव की लहर

अमेरिका:

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (जो इस समय दूसरा कार्यकाल संभाल रहे हैं) ने इज़राइल के हमले को “नैतिक रूप से उचित” बताते हुए कहा कि अमेरिका इज़राइल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को चेताया कि "अगला हमला तेहरान को अंधकार में डुबो देगा।"

संयुक्त राष्ट्र:

  • UN सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई गई

  • रूस और चीन ने इज़राइल की कार्रवाई को “एकतरफा उकसावा” बताया

  • अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने "ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा" को वैश्विक खतरा कहा

यूरोपीय संघ:

  • जर्मनी और फ्रांस ने शांति वार्ता की अपील की

  • तेल की कीमतों में उछाल को लेकर चिंता जताई गई


आर्थिक प्रभाव:

क्षेत्र प्रभाव
तेल बाजार कच्चे तेल की कीमतें $94 प्रति बैरल से बढ़कर $117 हो गईं
शेयर बाजार NYSE, Nikkei, Sensex समेत वैश्विक बाजारों में गिरावट
गोल्ड और बिटकॉइन सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव — सोना $2150/oz, बिटकॉइन $78,000
उड़ानें और यात्रा मिडल ईस्ट रूट्स पर अस्थायी रोक — Emirates और Qatar Airways ने फ्लाइट्स सस्पेंड कीं

संभावित परिणाम और चिंता

1. युद्ध की आशंका:

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और इज़राइल ने किसी भी तरह का संयुक्त ज़मीनी ऑपरेशन शुरू किया, तो यह टकराव सीरिया, लेबनान, यमन और अफगानिस्तान तक फैल सकता है।

2. हेज़बोल्लाह और हौथी शामिल हो सकते हैं:

ईरान के सहयोगी समूह जैसे लेबनानी हेज़बोल्लाह या यमन के हौथी विद्रोही अपने-अपने मोर्चों से इज़राइल या सऊदी अरब पर हमला कर सकते हैं।

3. परमाणु हथियारों का डर:

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को आशंका है कि अगर ईरान को और उकसाया गया, तो वह “दृश्य रूप से परमाणु हथियार परीक्षण” की घोषणा कर सकता है।


भारत पर संभावित प्रभाव

  • तेल मूल्य वृद्धि: भारत, जो अपनी 80% तेल आवश्यकता आयात करता है, पर इसका प्रत्यक्ष असर पड़ेगा। पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें ₹130/L तक पहुँच सकती हैं।

  • शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव: सेंसेक्स 1,200 अंक गिरा, निवेशकों को ₹4 लाख करोड़ का नुकसान हुआ

  • NRI चिंता: UAE, क़तर, बहरीन, और इराक में रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा चिंता का विषय बन चुकी है।

विदेश मंत्रालय ने Advisory Level-4 (Do Not Travel) घोषित किया है।


निष्कर्ष:

2025 का यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच नहीं है — यह एक भू-राजनीतिक थ्रिलर की तरह दुनिया को घसीट रहा है। इसमें कूटनीति की नाकामी, सैन्य शक्ति का प्रदर्शन, और वैश्विक अर्थव्यवस्था की नाजुकता स्पष्ट रूप से दिखती है। आने वाले दिन तय करेंगे कि क्या यह एक अस्थायी टकराव रहेगा या तीसरे विश्व युद्ध की आहट बन जाएगा।


आगे की राह:

संभावित समाधान व्याख्या
UN मध्यस्थता तात्कालिक युद्धविराम की दिशा में कदम
G7 और G20 आपात बैठकें तेल आपूर्ति और वैश्विक शांति के लिए सामूहिक प्रयास
भारत और अन्य न्यूट्रल देशों की भूमिका बातचीत के पुल का कार्य कर सकते हैं


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