भारतीय सेना को 2000 करोड़ की विशेष मंजूरी: आतंकवाद विरोधी अभियानों को नई ताक़त
24 जून 2025 को भारत सरकार ने एक अहम और रणनीतिक फैसला लेते हुए भारतीय सेना को आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए 2000 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता देने की घोषणा की। यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और सीमावर्ती तथा संवेदनशील क्षेत्रों में आतंकवाद से लड़ने की क्षमता को और अधिक मजबूत करने के दृष्टिकोण से लिया गया है।
इस मंजूरी का मुख्य उद्देश्य
भारत के गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के संयुक्त निर्णय के तहत इस बजट का उपयोग विशेष रूप से निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:
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आधुनिक हथियारों की खरीद: अत्याधुनिक राइफल, ड्रोन, ग्रेनेड लॉन्चर, नाइट विज़न डिवाइसेज़ और बुलेटप्रूफ जैकेट्स की खरीद।
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तकनीकी उन्नयन: सर्विलांस सिस्टम, AI आधारित निगरानी तकनीक और साइबर डिफेंस के क्षेत्र में नई तकनीकों का समावेश।
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लॉजिस्टिक सपोर्ट: आतंकवाद प्रभावित इलाकों जैसे जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया दलों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट।
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विशेष बलों को प्रशिक्षण: NSG, PARA SF, और MARCOS जैसी विशेष इकाइयों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और विदेशी टैक्टिक्स से लैस करना।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: सीमा पर बने बंकर, चौकियाँ, और कंट्रोल रूम को और अधिक सशक्त बनाना।
क्यों ज़रूरी था यह कदम?
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बढ़ती आतंकी घटनाएं: हाल के महीनों में जम्मू-कश्मीर, मणिपुर और छत्तीसगढ़ जैसे इलाकों में आतंकी और उग्रवादी घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है।
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सीमाओं पर तनाव: पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तनाव की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में भारतीय सेना को हमेशा उच्च स्तर की तैयारियों की आवश्यकता है।
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हाइब्रिड वॉरफेयर: आज का युद्ध केवल बंदूक और बारूद तक सीमित नहीं रहा। तकनीक, साइबर हमले और ड्रोन हमलों के प्रति सेना को सजग और सक्षम बनाना जरूरी हो गया है।
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युवाओं को प्रेरणा: सेना की सशक्त छवि युवा पीढ़ी को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी।
सेना की प्रतिक्रिया
भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा, "यह राशि हमारी तैयारियों को नई दिशा देगी और आतंकवाद के खिलाफ हमारी जवाबी कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाएगी।"
वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह रक्षा क्षेत्र के लिए एक साहसी और दूरदर्शी निर्णय है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
सरकार की ओर से रक्षा मंत्री ने संसद में यह स्पष्ट किया कि यह फंडिंग केवल आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए है और इसका उपयोग किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।
विपक्षी दलों ने कुछ बिंदुओं पर पारदर्शिता की मांग की लेकिन इस कदम का आम तौर पर समर्थन किया। कांग्रेस, TMC और AAP जैसी पार्टियों ने कहा कि सुरक्षा को लेकर राजनीतिक मतभेद नहीं होने चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
भारत का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है:
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अमेरिका: अमेरिका ने भारत के इस कदम की सराहना करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।
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रूस: रूस ने कहा कि भारतीय सेना को सशक्त करना एशिया में स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगा।
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संयुक्त राष्ट्र: UN ने यह कहा कि भारत की यह नीति आतंरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से वैध और प्रभावी है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में बड़ा और साहसिक कदम बताया है। ट्विटर पर #StrongArmy और #SecureIndia जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई रिटायर्ड सैन्य अधिकारी, जवानों के परिवार और सामान्य नागरिकों ने इस फैसले का समर्थन किया।
भविष्य की संभावनाएँ
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स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा: इस फंडिंग के माध्यम से मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी हथियार और तकनीक को भी बढ़ावा मिलेगा।
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नए भर्ती अभियानों की तैयारी: सेना में नए युवाओं की भर्ती और उन्हें विशेष प्रशिक्षण देना अब अधिक सशक्त होगा।
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आतंक के खिलाफ तीव्र अभियान: इस बजट से जम्मू-कश्मीर में चलाए जा रहे ऑपरेशन 'ऑल आउट' और उत्तर पूर्व में 'सद्भावना मिशन' को नया बल मिलेगा।
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बॉर्डर मैनेजमेंट: सीमाओं पर इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से तस्करी, घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
निष्कर्ष
भारतीय सेना को 2000 करोड़ रुपये की विशेष मंजूरी एक दूरगामी सोच का परिणाम है। यह केवल वर्तमान आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने का संकेत भी है। आज के समय में जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा एक जटिल विषय बन चुका है, भारत का यह फैसला उसे न केवल क्षेत्रीय ताकत बनाएगा, बल्कि विश्व मंच पर भी एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।
इस कदम से यह संदेश स्पष्ट हो गया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति नहीं, बल्कि पहले से तैयारी करने वाला, रणनीति आधारित और आत्मनिर्भर राष्ट्र है।

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