संगारेड्डी दवा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट: 12 की मौत, राहत कार्य जारी


🔴 संगारेड्डी दवा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट: 12 की मौत, राहत कार्य जारी

🔷 प्रस्तावना: एक और औद्योगिक हादसा

तेलंगाना के संगारेड्डी ज़िले में स्थित एक फार्मास्युटिकल फैक्ट्री में 29 जून 2025 की रात को भीषण धमाका हुआ, जिसमें अब तक 12 लोगों की मौत और दर्जनों घायल होने की पुष्टि हुई है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री की इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और आसपास के इलाकों में कंपन महसूस की गई।

यह घटना केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक सुरक्षा ढांचे पर एक गहरा सवालिया निशान बनकर उभरी है।


🔷 घटना का विवरण

यह हादसा Hy-Chem Laboratories Pvt. Ltd. नामक फार्मास्युटिकल यूनिट में रात लगभग 11:45 बजे हुआ। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, फॉर्म्युलेशन यूनिट में रसायनों के अनुचित मिश्रण या वॉल्व प्रेशर में विसंगति के कारण यह धमाका हुआ।

प्रभावित क्षेत्र:

  • विस्फोट से फैक्ट्री के भीतर काम कर रहे लगभग 30 श्रमिकों में से 12 की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

  • 15 से अधिक घायल कर्मचारियों को हैदराबाद के निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

  • राहत व बचाव कार्य अभी भी जारी है, क्योंकि मलबे में कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है।


🔷 प्रशासनिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने तत्काल आपात बैठक बुलाई और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) को संगारेड्डी भेजा गया।

मुख्य निर्णय व घोषणाएँ:

  • मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा।

  • घायलों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश।

  • फैक्ट्री संचालन की सुरक्षा जांच के आदेश दिए गए हैं।

  • घटनास्थल पर NDRF और दमकल विभाग की टीम राहत कार्य में लगी हुई है।


🔷 विस्फोट का संभावित कारण

हालाँकि जांच जारी है, लेकिन शुरुआती तकनीकी विश्लेषण में कुछ संभावित कारण सामने आए हैं:

  1. रसायन मिश्रण की चूक:
    फार्मास्युटिकल यूनिट में विस्फोटक रसायन जैसे कि नाइट्रोजन, इथेनॉल और अमोनिया का इस्तेमाल होता है। यदि तापमान या दाब नियंत्रण में चूक हो, तो विस्फोट का खतरा बढ़ जाता है।

  2. सुरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी:
    फैक्ट्री के गैस डिटेक्टर या तापमान नियंत्रक सिस्टम की विफलता की संभावना को जांचा जा रहा है।

  3. प्रशिक्षण की कमी:
    कई बार अस्थायी या ठेके पर रखे गए श्रमिकों को उचित सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं दिया जाता, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ता है।


🔷 प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी

फैक्ट्री के पास स्थित वर्कर्स कॉलोनी के निवासी रवि कुमार ने बताया:

"रात को अचानक ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो। धमाके की आवाज़ बहुत तेज़ थी और आस-पास की खिड़कियाँ टूट गईं। धुएं का गुबार चारों ओर फैल गया।"

एक घायल कर्मचारी रमेश ने बताया कि उसे कुछ भी समझ में नहीं आया और वह होश में आया तो अस्पताल में था।


🔷 औद्योगिक सुरक्षा पर उठते सवाल

यह दुर्घटना 2020 में विशाखापत्तनम में LG Polymers गैस लीक, और 2021 में पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट में आग की घटना की याद दिलाती है। भारत में हर वर्ष औद्योगिक दुर्घटनाओं की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है।

प्रमुख कारण:

  • लचर निरीक्षण प्रणाली

  • सुरक्षा नियमों की अनदेखी

  • श्रमिकों को PPE (सुरक्षा उपकरण) न देना

  • रात की शिफ्ट में कम स्टाफ या अयोग्य सुपरविजन

इस दुर्घटना ने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी अपग्रेडेशन से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा प्रशिक्षण को अनिवार्य रूप से मजबूत करना होगा।


🔷 सामाजिक व आर्थिक असर

  • परिवारों में मातम:
    मरने वालों में अधिकतर युवा कामगार थे, जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए थे और परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे।

  • स्थानीय लोगों में आक्रोश:
    लोगों ने मांग की है कि फैक्ट्री को तत्काल बंद किया जाए और जिम्मेदारों के खिलाफ हत्या के मुकदमे चलाए जाएँ।

  • आर्थिक नुकसान:
    फैक्ट्री को करोड़ों का नुकसान हुआ है। साथ ही दवा निर्माण की आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ा है।


🔷 अन्य प्रमुख घटनाएं: रेल किराया और LPG संकट

1. रेल किराया बढ़ा:
1 जुलाई से भारतीय रेलवे ने कई श्रेणियों के टिकट किराये में ₹10 से ₹50 तक की बढ़ोत्तरी की है। यह बदलाव डीजल कीमतों और संचालन लागत में वृद्धि के चलते किया गया है।

2. LPG की कमी:
तेलंगाना, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में LPG सिलेंडर की किल्लत महसूस की जा रही है। इसके पीछे प्रमुख कारण ट्रांसपोर्टेशन स्ट्राइक और उत्पादन में अस्थायी बाधा को माना जा रहा है।

इन दोनों घटनाओं ने आम जनता की जीवनशैली और खर्च पर सीधा असर डाला है।


🔷 निष्कर्ष: सुधार की जरूरत और भविष्य की राह

संगारेड्डी की इस भयावह दुर्घटना ने औद्योगिक सुरक्षा के मोर्चे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब ज़रूरत है:

  • राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा ऑडिट अभियान की

  • रोजगार देने वाली फैक्ट्रियों में सुरक्षा सर्टिफिकेशन को अनिवार्य बनाने की

  • श्रमिकों को नियमित रूप से प्रशिक्षित करने की नीति लागू करने की

सरकार को चाहिए कि वो “Ease of Doing Business” के साथ-साथ “Ease of Safe Working” पर भी बराबर ध्यान दे।


Comments